किस-किस को तू खुदा बनाएगी

किस-किस को तू खुदा बनाएगी,

किस-किस की तू हसरतें मिटाएगी,

कितने ही परदे डाल ले गुनाहों पे,

बेवफा तू बेवफा ही नजर आएगी।

कभी ग़म तो कभी तन्हाई मार गयी

कभी ग़म तो कभी तन्हाई मार गयी,

कभी याद आ कर उनकी जुदाई मार गयी,

बहुत टूट कर चाहा जिसको हमने,

आखिर में उनकी ही बेवफाई मार गयी।

किसी की खातिर मोहब्बत की इन्तेहाँ कर दो

किसी की खातिर मोहब्बत की इन्तेहाँ कर दो,

लेकिन इतना भी नहीं कि उसको खुदा कर दो,

मत चाहो किसी को टूट कर इस कदर इतना,

कि अपनी वफाओं से उसको बेवफा कर दो।