फिर सुबह एक नई रोशन हुई,
फिर उम्मीदें नींद से झांकती मिली,
वक़्त का पंछी घरोंदे से उड़ा,
अब कहाँ ले जाए तूफाँ क्या पता।
सुप्रभात!
जोक्स और शायरी हिंदी में
फिर सुबह एक नई रोशन हुई,
फिर उम्मीदें नींद से झांकती मिली,
वक़्त का पंछी घरोंदे से उड़ा,
अब कहाँ ले जाए तूफाँ क्या पता।
सुप्रभात!