Bewafa Shayari

50+ Bewafa Shayari – बेवफा शायरी

किसी ने दिया धोखा, किसी का टूटा दिल, किसी को मिली तोह सिर्फ और सिर्फ बेवफाई – Below is the Collection of Top Bewafa Shayari in Hindi . Share and Comment.


दिल से रोये मगर होंठो से मुस्कुरा बेठे,
यूँ ही हम किसी से वफ़ा निभा बेठे,
वो हमे एक लम्हा न दे पाए अपने प्यार का,
और हम उनके लिये जिंदगी लुटा बेठे!


गुजारिश हमारी वह मान न सके,
मज़बूरी हमारी वह जान न सके,
कहते हैं मरने के बाद भी याद रखेंगे,
जीते जी जो हमें पहचान न सके.


देख ली न तुमने मेरे ऑसुओ की ताकत ll
कल रात मेरी ऑखे नम थी ll
आज तेरा सारा शहर भीगा हैं ll


तू तो हँस हँसकर जी रही है,
जुदा होकर भी….कैसे जी पाया होगा वो,

जिसने तेरे सिवा जिन्दगी कभी सोची ही नहीं.


हमसे पूछो क्या होता है पल पल बिताना,
बहुत मुश्किल होता है दिल को समझाना,
यार ज़िन्दगी तोह बीत जायेगी,
बस मुश्किल होता है कुछ लोगो को भूल पाना.


दश्त था, सेहरा था, तन्हाई थी, वीरानी थी,

अपने ही अपने नही थे…बस यही हैरानी थी.


हम सिमटते गए उनमें और वो हमें भुलाते गए..
हम मरते गए उनकी बेरुखी से, और वो हमें आजमाते गए ..
सोचा की मेरी बेपनाह मोहब्बत देखकर सीख लेंगी वफाएँ करना ..
पर हम रोते गए और वो हमें खुशी-खुशी रुलाते गए..!


एक फूल का दर्द उसकी जुकि डाली समजते हे,
बाग की बात बाग का माली ही समजते हे,
ये किस तरह की रात बनाई हे दुनियावाले ने,

दिए का दिल जलता हे और लोग रोशनी समजते हे.


आपकी नशीली यादों में डूबकर,
हमने इश्क की गहराई को समझा,
आप तो दे रहे थे धोखा और,
हमने जानकर भी कभी आपको बेवफा न समझा।


हकीकत जान लो जुदा होने से पहले,
मेरी सुन लो अपनी सुनाने से पहले,
ये सोच लेना भूलने से पहले,
बहुत रोई हैं ये आँखें मुस्कुराने से पहले.


इश्क़ सभी को जीना सिखा देता है,
वफ़ा के नाम पर मरना सीखा देता है,
इश्क़ नहीं किया तो करके देखो,
ज़ालिम हर दर्द सहना सीखा देता है!


हर वक़्त तेरे आने की आस रहती है!
हर पल तुझसे मिलने की प्यास रहती है!
सब कुछ है यहाँ बस तू नही!
इसलिए शायद ये जिंदगी उदास रहती है!


उनकी मोहब्बत का अभी निशान बाकी हैं,
नाम लब पर हैं मगर जान अभी बाकी हैं,
क्या हुआ अगर देख कर मूंह फेर लेते हैं वो..
तसल्ली हैं कि अभी तक शक्ल कि पहचान बाकी हैं!


न वो आ सके न हम कभी जा सके,
न दर्द दिल का किसी को सुना सके,
बस बैठे है यादों में उनकी,
न उन्होंने याद किया और न हम उनको भुला सके !!

दर्द ही सही मेरे इश्क का इनाम तो आया,
खाली ही सही हाथों में जाम तो आया,
मैं हूँ बेवफ़ा सबको बताया उसने,
यूँ ही सही, उसके लबों पे मेरा नाम तो आया।


तेरा ख्याल दिल से मिटाया नहीं अभी,
बेवफा मैंने तुझ को भुलाया नहीं अभी।


इश्क़ के खुमार में उसे अपनी जिंदगी बना लिया,
जब भी उसकी याद आई दिल थामकर रो लिया,
वफ़ा का नाम देकर उसने बेबफाई की तो क्या हुआ,
जिंदगी थी वो मेरी उसके दिए सारे ग़म बर्दाश्त कर लिया।


किसी की खातिर मोहब्बत की इन्तेहाँ कर दो,
लेकिन इतना भी नहीं कि उसको खुदा कर दो,
मत चाहो किसी को टूट कर इस कदर इतना,
कि अपनी वफाओं से उसको बेवफा कर दो।


अनजाने में यूँ ही हम दिल गँवा बैठे,
इस प्यार में कैसे धोखा खा बैठे,
उनसे क्या गिला करें.. भूल तो हमारी थी
जो बिना दिलवालों से ही दिल लगा बैठे।


उड़ रहा था मेरा दिल भी परिंदों की तरह,
तीर जब लग गई तो कोई भी मरहम न हुआ,
देख लेना था मुझे भी हर सितम की अदा,
ऐ सनम तेरे जैसा मेरा कोई दुश्मन न हुआ.


हम सिमटते गए उनमें और वो हमें भुलाते गए,
हम मरते गए उनकी बेरुखी से, और वो हमें आजमाते गए,
सोचा की मेरी बेपनाह मोहब्बत देखकर सीख लेंगी वफाएँ करना,
पर हम रोते गए और वो हमें खुशी खुशी रुलाते गए..!!


बेवफाई उसकी दिल से मिटा के आया हूँ,
ख़त भी उसके पानी में बहा के आया हूँ,
कोई पढ़ न ले उस बेवफा की यादों को,
इसलिए पानी में भी आग लगा कर आया हूँ।


टूटा हो दिल तो दुःख होता है,
करके मोहब्बत किसी से ये दिल रोता है,
दर्द का एहसास तो तब होता है,
जब किसी से मोहब्बत हो और उसके दिल में कोई और होता है।


उसने महबूब ही तो बदला है फिर ताज्जुब कैसा,
दुआ कबूल ना हो तो लोग खुदा तक बदल लेते है।


तेरे प्यार का सिला हर हाल में देंगे,
खुदा भी मांगे ये दिल तो टाल देंगे,
अगर दिल ने कहा तुम बेवफ़ा हो,
तो इस दिल को भी सीने से निकाल देंगे।


कैसे मिलेंगे हमें चाहने वाले बताइये,
दुनिया खड़ी है राह में दीवार की तरह,
वो बेवफ़ाई करके भी शर्मिंदा ना हुए,
सजाएं मिली हमें गुनहगार की तरह।


टूटे हुए दिल ने भी उसके लिए दुआ मांगी,
मेरी साँसों ने हर पल उसकी ख़ुशी मांगी,
न जाने कैसी दिल्लगी थी उस बेवफा से,
कि मैंने आखिरी ख्वाहिश में भी उसकी वफ़ा मांगी।


कैसे यकीन करें हम तेरी मोहब्बत का,
जब बिकती है बेवफाई तेरे ही नाम से।


एक दिन हम आपसे इतने दूर हो जायेंगे,
के आसमान के इन तारो में कही खो जायेंगे,
आज मेरी परवाह नहीं आपको,
पर देखना एक दिन हद से ज्यादा.. हम आपको याद आएंगे!!


वो कब का भूल चुका होगा हमारी वफ़ा का किस्सा,
बिछड़ के किसी को किसी का ख्याल कब रहता है।


कदम कदम पर बहारो ने साथ छोडा,
जरुरत पडने पर यारो ने साथ छोडा,
बादा किया सितारोँ ने साथ निभाने का,
सुबह होने सितारो ने साथ छोडा.


इश्क़ ने जब माँगा खुदा से दर्द का हिसाब,
वो बोले हुस्न वाले ऐसे ही बेवफाई किया करते हैं।


हमने भी किसी से प्यार किया था,
हाथो मे फूल लेकर इंतेज़ार किया था,
भूल उनकी नही भूल तो हमारी थी,
क्यों की उन्हो ने नही, हमने उनसे प्यार किया था..!!


जो जले थे हमारे लिऐ,
बुझ रहे हैं वो सारे दिये,
कुछ अंधेरो ने की थी साजिशें,
कुछ उजालों ने धोखे दिये.


हसीनो ने हसीन बनकर गुनाह किया,
औरों को तो क्या हमको भी तबाह किया,
पेश किया जब ग़ज़लों में हमने उनकी बेवफ़ाई को,
औरों ने तो क्या उन्होने भी वाह-वाह किया.


उल्फत का अक्सर यही दस्तूर होता है,
जिसे चाहो वही अपने से दूर होता है,
दिल टूटकर बिखरता है इस कदर,
जैसे कोई कांच का खिलौना चूर-चूर होता है!


आग दिल में लगी जब वो खफ़ा हुए,
महसूस हुआ तब, जब वो जुदा हुए,
करके वफ़ा कुछ दे ना सके वो,
पर बहुत कुछ दे गए जब वो बेवफ़ा हुए!


उसके चले जाने के बाद..
हम महोबत नहीं करते किसी से..
छोटी सी जिन्दगी है..
किस किस को अजमाते रहेंगे|


तुझे चिठ्ठीयां नहीं करवटो की नकल भेजेंगे,
अब चादर के नीचे कार्बन लगाने लगे हैँ हम,
एक ख्वाहिश है मेरी, पूरी हो इबादत के बगैर,

वो आकर लिपटे मुझसे, मेरी इजाजत के बगैर.


हर भूल तेरी माफ़ की..
हर खता को तेरी भुला दिया..
गम है कि, मेरे प्यार का..
तूने बेवफा बनके सिला दिया|


वो हमें भूल भी जायें तो कोई गम नहीं,
जाना उनका जान जाने से भी कम नहीं,
जाने कैसे ज़ख़्म दिए हैं उसने इस दिल को,
कि हर कोई कहता है कि इस दर्द की कोई मरहम नहीं।


रात की गहराई आँखों में उतर आई,
कुछ ख्वाब थे और कुछ मेरी तन्हाई,
ये जो पलकों से बह रहे हैं हल्के हल्के,
कुछ तो मजबूरी थी कुछ तेरी बेवफाई|


बिछड़ के तुमसे ज़िन्दगी सज़ा लगती है
ये सांस भी जैसे मुझसे ख़फ़ा लगती है
अगर उम्मीद-ए-वफ़ा करूँ तो किससे करूँ

मुझको तो मेरी ज़िंदगी भी बेवफा लगती है.


तू तो हँस हँसकर जी रही है,
जुदा होकर भी..
कैसे जी पाया होगा वो,
जिसने तेरे सिवा जिन्दगी कभी सोची ही नहीं..


रात की गहराई आँखों में उतर आई,
कुछ ख्वाब थे और कुछ मेरी तन्हाई,
ये जो पलकों से बह रहे हैं हल्के हल्के,

कुछ तो मजबूरी थी कुछ तेरी बेवफाई.


उसे उड़ने का शौक था..
और हमें उसके प्यार की कैद पसंद थी..
वो शौक पूरा करने उड़ गयी जो..
आखिरी सांस तक साथ देने को रजामंद थी|


पूछते है सब जब बेवफा था तो उसे
दिल दिया ही क्यों
*
*
किस किस को बतलाये
*
*
*
उस शख्स में बात ही कुछ ऐसी थी
दिल नहीं देते तो जान चली जाती”.


मेरी वफ़ा की कदर ना की,
अपनी पसंद पे तो ऐतबार किया होता,
सुना है वो उसकी भी ना हुई,
मुझे छोड दिया था उसे तो अपना लिया होता|


समेट कर ले जाओ..
अपने झूठे वादों के अधूरे क़िस्से..
अगली मोहब्बत में तुम्हें फिर..
इनकी ज़रूरत पड़ेगी।


हर वक़्त तेरे आने की आस रहती है!
हर पल तुझसे मिलने की प्यास रहती है!
सब कुछ है यहाँ बस तू नही!

इसलिए शायद ये जिंदगी उदास रहती है!


टूटे हुए प्याले में जाम नहीं आता,
इश्क़ में मरीज को आराम नहीं आता,
ये बेवफा दिल तोड़ने से पहले ये सोच तो लिया होता,
की टुटा हुआ दिल किसी के काम नहीं आता !!


घुट घुट कर जीना तो
ज़िन्दग़ी नहीं होती,

नफरत से सर झुकाना
बन्दग़ी नहीं होती,

वो ग़ुनाह माफ़ी के
लायक नहीं है,

जिसमें शामिल कोई
शर्मिन्दग़ी नहीं होती ।


टूटे हुए दिल ने भी उसके लिए दुआ मांगी,
मेरी साँसों ने हर पल उसकी ख़ुशी मांगी..
न जाने कैसी दिल्लगी थी उस बेवफा से,
के मैंने आखिरी ख्वाहिश में भी उसकी वफ़ा मांगी….


हम तो जल गये उसकी मोहब्बत में
मोमकी तरह,
अगर फिर भी वो हमें बेवफा कहे…तो
उसकी वफ़ा को सलाम..


हमनें अपनी साँसों पर उनका नाम लिख लिया,
नहीं जानते थे कि हमनें कुछ गलत किया,
वो प्यार का वादा करके हमसे मुकर गए,
ख़ैर उनकी बेवाफाई से हमनें कुछ तो सबक लिया!


जख्म बन जानेँ की आदत है उसकी,
रुला कर मुस्कुरानेँ की आदत है उसकी,
मिलेगेँ कभी तोँ खुब रूलायेँ उसको,

सुना है रोतेँ हूऐ लिपट जाने की आदत है उसकी.


क्या बताऊँ मेरा हाल कैसा है,
एक दिन गुज़रता है एक साल जैसा है,
तड़पता हूँ इस कदर बेवफाई में उसकी,
ये तन बनता जा रहा कंकाल जैसा है।


उल्फत में अक्सर ऐसा होता है,
आँखे हंसती हैं और दिल रोता है,
मानते हो तुम जिसे मंजिल अपनी,
हमसफर उनका कोई और होता है!


मेरी वफ़ा की कदर ना की,
अपनी पसंद पे तो ऐतबार किया होता,
सुना है वो उसकी भी ना हुई,

मुझे छोड दिया था उसे तो अपना लिया होता.


कैसे मिलेंगे हमें चाहने वाले बताइये,
दुनिया खड़ी है राह में दीवार की तरह,
वो बेवफ़ाई करके भी शर्मिंदा ना हुए,
सजाएं मिली हमें गुनहगार की तरह..


उसे उड़ने का शौक था,
और हमें उसके प्यार की कैद पसंद थी,
वो शौक पूरा करने उड़ गयी जो,

आखिरी सांस तक साथ देने को रजामंद थी.


हमें न मोहब्बत मिली न प्यार मिला;
हम को जो भी मिला बेवफा यार मिला!
अपनी तो बन गई तमाशा ज़िन्दगी;
हर कोई अपने मकसद का तलबगार मिला!


तन्हाई का उसने मंज़र नहीं देखा,
अफ़सोस की मेरे दिल के अन्दर नहीं देखा,
दिल टूटने का दर्द वो क्या जाने,

वो लम्हा उसने कभी जी कर नहीं देखा.


वो रात दर्द और सितम की रात होगी,
जिस रात रुखसत उनकी बारात होगी,
उठ जाता हूँ मैं ये सोचकर नींद से अक्सर,
कि एक गैर की बाहों में मेरी सारी कायनात होगी।


आपकी नशीली यादों में डूबकर,
हमने इश्क की गहराई को समझा,
आप तो दे रहे थे धोखा और,
हमने जानकर भी कभी आपको बेवफा न समझा।


मेरी साँसों को भी आज टूट जाने दे ए-खुदा,
मेरे ख्वाबों की तरह, उसके वादों.
तेरे सिवा कौन समा सकता है मेरे दिल में,

रुह तक गिरवी है मेरी, तेरी चाहत में.


वो रोए तो बहुत.. पर मुहं मोड़कर रोए..
कोई तो मजबूरी होगी.. जो दिल तोड़कर रोए..
मेरे सामने कर दिए मेरी तस्वीर के टुकडे़..
पता चला मेरे पीछे वो उन्हें जोड़कर रोए..


कहाँ कोई ऐसा मिला जिस पर हम दुनिया लुटा देते,
हर एक ने धोखा दिया, किस-किस को भुला देते,
अपने दिल का ज़ख्म दिल में ही दबाये रखा,
बयां करते तो महफ़िल को रुला देते।


उन्होंने हमें आजमाकर देख लिया,
इक धोखा हमने भी खा कर देख लिया.
क्या हुआ हम हुए जो उदास,

उन्होंने तो अपना दिल बहला के देख लिया.


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