Wahi Pyaas ke Angadh Moti – Kumar Vishvas Shayari

वही प्यास के अनगढ़ मोती, वही धूप की सुर्ख कहानी,

वही आंख में घुटकर मरती, आंसू की खुद्दार जवानी,

हर मोहरे की मूक विवशता, चौसर के खाने क्या जाने ?

हार जीत तय करती है वे, आज कौन से घर ठहरेंगे !

निकल पडे हैं पांव अभागे,जाने कौन डगर ठहरेंगे ?