आखिर क्यों मुझे तुम इतना दर्द देते हो
जब भी मन में आये क्यों रुला देते हो
निगाहें बेरुखी हैं और तीखे हैं लफ्ज़
ये कैसी मोहब्बत हैं जो तुम मुझसे करते हो


 मेरे बहते आंसुओ की कोई कदर नहीं
क्यों इस तरह नजरो से गिरा देते हो
क्या यही मौसम पसंद है तुम्हे जो,
सर्द रातो में आंसुओ की बारिश करवा देते हो 


आखिर क्यों मुझे तुम इतना दर्द देते हो
जब भी मन में आये क्यों रुला देते हो


 जिस्म से होने वाली मोहब्बत का इज़हार आसान होता है
रूह से हुई मोहब्बत समझने में ज़िन्दगी गुजर जाती है


कब तक करेंगे इंतजार अब तो जान भी जाने लगी
हम पे तरस खाके अब तो मौत भी पास आने लगी


दर्द ज़िन्दगी में बहुत सुहाने मिले है,
हर तरफ हमें ग़मखारे मिले है,
कुछ तो जीत गए है मौत को ज़िन्दगी देकर,
कुछ अपनी ज़िन्दगी से ही हारे मिले


 ज़िन्दगी के उलझे सवालो के जवाब ढूंढता हु
कर सके जो दर्द कम, वोह नशा ढूंढता हु
वक़्त से मजबूर, हालात से लाचार हु मैं
जो देदे जीने का बहाना ऐसी राह ढूंढता हु


आखिर क्यों मुझे तुम इतना दर्द देते हो
जब भी मन में आये क्यों रुला देते हो


निगाहें बेरुखी हैं और तीखे हैं लफ्ज़
ये कैसी मोहब्बत हैं जो तुम मुझसे करते हो


मेरे बहते आंसुओ की कोई कदर नहीं
क्यों इस तरह नजरो से गिरा देते हो
क्या यही मौसम पसंद है तुम्हे जो,
सर्द रातो में आंसुओ की बारिश करवा देते हो


तीर दर्द का सा लगता है सीने में मेरे
जब कांपता देख भी तुम मुस्कुरा देते हो
लोग तो मुर्दे को भी सीने से लगा कर प्यार करते हैं
फिर क्यों मेरे करीब आकर तुम हर बार ज़ख्म नया देते हो


आखिर क्यों मुझे तुम इतना दर्द देते हो
जब भी मन में आये क्यों रुला देते हो


आहट से भी चौंक जाए, मुस्कराने से ही कतराए
मालूम नहीं क्यों ज़िन्दगी, जीने से डरती है बहुत ।


Khamosh laboo par bhi raaz kuch gehre hote hai
Muskurahat ke piche bhi jakham gehre hote hain
Hastee huyi unn aankhon ki nami ko dekho…..
Jin mein chupe huye hazaro dard gehre hote hai


ऐसे ही ग़मों के संग अब कैसे जियेगें हम,
बढ़ते हुए मेरे कदम यही पे न ठहर जायें।


मेरी ज़िन्दगी से खेलने वाले सुन
तेरा भी एक दिन यही हाल होगा
क्या मिलेगी नहीं कभी मुझे मोहोब्बत
तेरे होंठों पर भी एक दिन यही सवाल होगा


करते नहीं वफ़ा आज कल लोग इश्क़ में भी साहिब,
तो भला उम्मीद अपनेपन की रखना किसी से कहा की समझदारी है।


बेवफा तेरा मासुम चेहरा
भुल जाने के काबिल नही
है मगर तु बहुत खुबसुरत
पर दिल लगाने के काबिल नही   


हर भूल तेरी माफ़ की
हर खता को तेरी भुला दिया
गम है कि, मेरे प्यार का.
तूने बेवफा बनके सिला दिया


टूट कर चाहना और फिर टूट जाना

बात छोटी है मगर जान निकल जाती है


ए ख़ुदा आज दिल बहुत उदास है

या तो मौत देदे या फिर जिंन्दगी देदे


 रात की गहराई आँखों में उतर आई
कुछ ख्वाब थे और कुछ मेरी तन्हाई
ये जो पलकों से बह रहे हैं हल्के हल्के
कुछ तो मजबूरी थी कुछ तेरी बेवफाई.


तुमसे बात किये बिना ज़िन्दगी भर रह सकते है 

लेकिन तुम्हे याद किये बिना एक पल भी नही


हर भूल तेरी माफ़ की
हर खता को तेरी भुला दिया
गम है कि, मेरे प्यार का.
तूने बेवफा बनके सिला दिया


बिछड़ के तुमसे ज़िन्दगी सज़ा लगती है
ये सांस भी जैसे मुझसे ख़फ़ा लगती है
अगर उम्मीद-ए-वफ़ा करूँ तो किससे करूँ
मुझको तो मेरी ज़िंदगी भी बेवफा लगती है


ना करना हमसे प्यार का फिर झुठा वादा.
माँगी है आज दुआ के तुझे भुल जाएँ हम


इश्क़ का खेल बहुत ही अजीब हो गया है
इंसा दिल के बहुत करीब हो गया है
भर तो ली है झोली उन सब ने सिक्कों से
मगर, चाहत के मुकाबले बहुत गरीब हो गया है


अगर वो दरिया-ऐ-हुस्न रखते है
तो हम भी गम-ऐ-सागर रखते है
वो रखते है अगर दामन में, खंज़र-ऐ-बेवफाई
तो हम भी, तन्हाई का गागर रखते है…!!


तेरे गम को अपनी रूह में उतार लूँ 

ज़िन्दगी तेरी चाहत में सवार लूँ

मुलाकात हो तुझ से कुछ इस तरह 

तमाम उम्र बस एक मुलाकात में गुजार लूँ 


मोहब्बत भी ,शरारत भी, शराफ़त भी, इबादत भी,

बहोत कुछ करके देखा फ़िर भी हम तेरे न हो पाये 


Dilon me agar darar ho to sangam nahi bante,
Baat agar ruswai ki ho to fir apne nahi bante,
Humne duniya me yahi hote dekha “shaad”
Jhakhm agar khudke ho to fir malham nahi milte..!!


बिछड़ के तुमसे ज़िन्दगी सज़ा लगती है
ये सांस भी जैसे मुझसे ख़फ़ा लगती है
अगर उम्मीद-ए-वफ़ा करूँ तो किससे करूँ
मुझको तो मेरी ज़िंदगी भी बेवफा लगती है


तुझे चिठ्ठीयां नहीं करवटो की नकल भेजेंगे
अब चादर के नीचे कार्बन लगाने लगे हैँ हम
एक ख्वाहिश है मेरी, पूरी हो इबादत के बगैर
वो आकर लिपटे मुझसे, मेरी इजाजत के बगैर


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